पंजाबराज्य

सुखबीर बादल पर AAP के सवाल, बहरीन से पत्नी और गाड़ी से जुड़ा मुद्दा गरमाया

चंडीगढ़.

आम आदमी पार्टी (AAP) पंजाब के जनरल सेक्रेटरी और मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने शिरोमणि अकाली दल (बादल) के नेताओं सुखबीर सिंह बादल, हरसिमरत कौर बादल और बिक्रम सिंह मजीठिया पर निशाना साधा है.

उन्होंने इसी के साथ शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के प्रधान हरजिंदर सिंह धामी की श्री आनंदपुर साहिब में एसजीपीसी की सराय में रह रही एक बहरीन की महिला के आरोपों पर लगातार चुप्पी पर भी सवाल उठाया. बलतेज पन्नू ने कहा कि वह इस मामले पर पहले ही करीब चार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुके हैं, लेकिन सिख समुदाय के उठाए गए सवालों का अभी तक जवाब नहीं मिला है. बलतेज पन्नू ने कहा, “हरसिमरत कौर बादल महिलाओं के मुद्दों पर प्रोग्राम और रैलियों में हिस्सा ले रही हैं, लेकिन एक महिला के महीनों तक एसजीपीसी की साड़ी में रहने से जुड़े आरोपों पर पूरी तरह चुप्पी साधे हुए हैं. वह इन सवालों का जवाब क्यों नहीं दे रही हैं? जब एक महिला के साथ हुए बर्ताव और एसजीपीसी के रिसोर्स के इस्तेमाल पर सवाल उठ रहे हैं, तो चुप्पी क्यों है?”

इन सवालों का जवाब कब देंगे?
हरजिंदर सिंह धामी पर सवाल उठाते हुए बलतेज पन्नू ने कहा, “धामी साहब ने मीडिया का सामना करने के बजाय एक वीडियो भी जारी किया है. आज जब पटियाला में मीडिया ने उनसे सवाल पूछे तो उन्होंने फिर कहा कि वह इस मामले पर कुछ नहीं कहेंगे क्योंकि वह वहां किसी और काम से आए थे. हरजिंदर सिंह धामी कब प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे और इन सवालों का जवाब देंगे?” आप पंजाब के मीडिया इंचार्ज ने कहा, “यह कोई साधारण राजनीतिक विवाद नहीं है. एक एसजीपीसी संगठन, एसजीपीसी के रिसोर्स और जिस तरह से एक महिला को महीनों तक वहां रखा गया, उस पर सवाल उठाए जा रहे हैं. सिख समुदाय को सवाल पूछने और साफ जवाब पाने का पूरा हक है.” उन्होंने कहा, “महिला ने कहा है कि उसने हरजिंदर सिंह धामी और सुखबीर सिंह बादल को सब कुछ बता दिया था. क्या यह कमेटी हरजिंदर सिंह धामी से पूछताछ करेगी? क्या यह सुखबीर सिंह बादल से पूछताछ करेगी? क्या यह जांच करेगी कि उन्हें क्या पता था, उन्हें कब पता चला और क्या कार्रवाई की गई?”

रिपोर्ट देने के लिए 15 दिन का समय दिया
आप पंजाब के मीडिया इंचार्ज ने कहा, “अगर एसजीपीसी सच में बिना किसी भेदभाव के जांच चाहती है, तो यह काम अनुभवी लोगों को देना चाहिए. किसी रिटायर्ड सिख जज या रिटायर्ड सीनियर पुलिस अधिकारी से जांच करने को कहा जा सकता था. ये जूनियर मेंबर न तो कानून के माहिर हैं और न ही प्रशासन के. बिना किसी स्वतंत्र और अनुभवी जांच के, सीनियर लोगों से जुड़े मामले में सही जांच कैसे हो सकती है?” बलतेज पन्नू ने कहा कि एसजीपीसी ने जांच कमेटी को अपनी रिपोर्ट देने के लिए 15 दिन का समय दिया है, लेकिन सवाल उठाया कि क्या यह कदम सिर्फ मामले को ठंडे बस्ते में डालने के लिए उठाया गया है. उन्होंने कहा कि एसजीपीसी ने कमेटी को 15 दिन का समय दिया है. क्या यह सोचा जा रहा है कि 10 या 15 दिन बाद मामला पीछे छूट जाएगा और लोग इसे भूल जाएंगे? लोग इस मुद्दे को नहीं भूलेंगे. पूरी दुनिया में सिख समुदाय इस बारे में बात कर रहा है और पंजाबी मीडिया चैनलों द्वार भी इस मुद्दे पर चर्चा की जा रही हैं. “15 दिन बाद भी सवाल कायम रहेंगे. 10 दिन बाद भी रहेंगे और 10 महीने बाद भी रहेंगे जब तक सही जवाब नहीं मिल जाते.

₹1 लाख एक बहरीन की महिला के अकाउंट में ट्रांसफर
बलतेज पन्नू ने मामले में नया खुलासा करते हुए कहा, 23 जुलाई, 2026 को पंजाब नेशनल बैंक में एसजीपीसी सेक्रेटरी के नाम पर खोले गए अकाउंट से ₹1 लाख एक बहरीन की महिला के अकाउंट में ट्रांसफर किए गए थे. यह ₹1 लाख क्यों ट्रांसफर किए गए? यह किस मकसद से दिए गए थे? इस पेमेंट को किसने मंज़ूरी दी? यह पैसा किस हेड में ट्रांसफर किया गया? एसजीपीसी को इन सवालों के जवाब देने चाहिए.”बलतेज पन्नू ने पूछा, “क्या इससे बड़ा कोई सबूत हो सकता है? एफआईआर खुद एक बड़ा सबूत थी, लेकिन किसी ने उन सवालों के जवाब नहीं दिए. अब यह एसजीपीसी के अकाउंट से उस महिला के अकाउंट में ट्रांसफर है जिसने आरोप लगाया था. यह ₹1 लाख क्यों ट्रांसफर किए गए? यह किस मकसद के लिए दिए गए थे?” बलतेज पन्नू ने कहा, “यह सिर्फ़ एक ट्रांसफर है. बाकी पेमेंट का क्या? कैश खर्च का क्या? उसके रहने, खाने, घूमने और दूसरी सुविधाओं पर हुए खर्च का क्या? गाड़ी एसजीपीसी ने दी थी, उसका फ्यूल एसजीपीसी ने दिया था, ड्राइवर को एसजीपीसी ने दिया था और सेवादार एसजीपीसी के कर्मचारी थे. इसके अलावा, अगर उसे पर्सनल खर्च के लिए भी पैसे दिए जा रहे थे, तो उन आठ महीनों के पूरे खर्च का हिसाब दिया जाना चाहिए.”

दुनिया भर की सिख कम्युनिटी का योगदान
बलतेज पन्नू ने कहा, “ये संस्थाएं कुर्बानियों से बनी हैं. दुनिया भर की सिख कम्युनिटी इनमें अपना योगदान देती है. वे इसलिए योगदान नहीं देते कि आप एक महिला को एसजीपीसी सराय में ले आएं, उसे आठ महीने तक वहां रखें, उसे परेशान करें और कम्युनिटी को कोई यह भी न बताए कि उसे वहां क्यों और किस मकसद से रखा गया था. सिख कम्युनिटी को यह जानने का हक है कि उसकी संस्थाएं कैसे चल रही हैं. उसे यह जानने का हक है कि उसका पैसा कैसे खर्च हो रहा है. किसी को भी कम्युनिटी के योगदान को पर्सनल या राजनीतिक रिसोर्स के तौर पर इस्तेमाल करने का हक नहीं है.” बलतेज पन्नू ने सवाल किया, “11 साल से एसजीपीसी के चुनाव क्यों नहीं हुए? सिख संगत को अपने प्रतिनिधि चुनने से क्यों दूर रखा जा रहा है? ये वो सवाल हैं जो सिख संगत और सिख बुद्धिजीवियों को पूछने चाहिए,”

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