मध्य प्रदेश

टाइगर मूवमेंट वाले क्षेत्रों में सड़क प्रस्ताव पर आपत्ति, भोपाल के ड्राफ्ट प्लान 2047 पर नागरिकों ने दिए सुझाव

भोपाल
 भावी विकास की रूपरेखा तय करने वाले ड्राफ्ट डेवलपमेंट प्लान 2047 को लेकर शहर में गहमागहमी बढ़ गई है। इस ड्राफ्ट में जमीन के इस्तेमाल (लैंड-यूज) के वर्गीकरण, सड़कों के अलाइनमेंट और मौजूदा रिहायशी इलाकों के भविष्य को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। आम नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों ने प्रस्तावित ज़ोनिंग और पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील इलाकों में बदलाव की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया है।

25 अक्टूबर तक आए 800 से अधिक सुझाव और आपत्तियां
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (T&CP) विभाग के पास आगामी 25 अक्टूबर की अंतिम तिथि से पहले लगभग 800 सुझाव और आपत्तियां पहुंच चुकी हैं। विभाग अब इन सभी सबमिशन की बारीकी से जांच करेगा और इसके बाद ही मास्टर प्लान को अंतिम रूप दिया जाएगा। नागरिकों और विभिन्न संगठनों द्वारा उठाए गए इन मुद्दों ने प्रशासन की प्लानिंग पर नए सिरे से विचार करने का दबाव बना दिया है।

मुख्य मांगें और आपत्तियां क्या हैं?
प्राप्त जानकारियों के अनुसार, सबसे प्रमुख मांग 'बीआईजेड-2' (BIZ-2) लैंड-यूज कैटेगरी को हटाने की है, ताकि वहां रिहायशी और व्यावसायिक गतिविधियां आसानी से संचालित हो सकें। इसके अलावा, ग्रीन बेल्ट और कृषि भूमि को आवासीय उपयोग के लिए फिर से वर्गीकृत करने, 18 मीटर चौड़ी प्रस्तावित सड़कों के अलाइनमेंट बदलने और कुछ चुनिंदा क्षेत्रों को इको-संवेदनशील जोन से बाहर करने की मांग भी जोर पकड़ रही है।

स्थानीय स्तर पर विरोध और पर्यावरण की चिंताएं
शहर के पॉश इलाकों जैसे बावडिया कलां और बाघमुग़लिया के निवासियों ने प्रस्तावित वेस्टर्न बायपास के साथ कनेक्टिविटी को लेकर सवाल खड़े किए हैं। वहीं, पर्यावरण के मोर्चे पर भी गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। लाहरपुर में 643 एकड़ कृषि भूमि को, जो कथित तौर पर पिछले 30 वर्षों से खेती के अधीन है, निर्धारित सबमर्जेंस (डूब) क्षेत्र से बाहर करने की मांग की गई है। इसके अलावा, उन इलाकों में प्रस्तावित सड़कों को लेकर भी गहरी चिंता जताई गई है जो बाघों की आवाजाही (टाइगर मूवमेंट) के लिए जाने जाते हैं।

सेफ सिटी के यह है आठ पैरामीटर

  •     प्रमुख स्थानों पर एआइ आधारित सीसीटीवी, ड्रोन, अलार्म, कंट्रोल सेंटर और संदिग्ध गतिविधियों की रिपोर्ट के लिए विशेष मोबाइल ऐप।
  •     सुरक्षा का दायरा बढ़ाने के लिए निजी भवन और कालोनियों के गेट लगे कैमरों को पुलिस व प्रशासन के सेंट्रल सर्वर से जोड़ना।
  •     संवेदनशील इलाकों में अत्याधुनिक हथियारों और बेहतर सुविधाओं से लैस पुलिस बल की तैनाती।
  •     पार्कों व भवनों में ऊंची दीवारों की जगह पारदर्शी फेंसिंग, चौतरफा स्ट्रीट लाइट्स और सक्रिय सामाजिक निगरानी।
  •     नियंत्रित गति, सही ज्यामिति, डिवाइडर, सिग्नल और पैदल यात्रियों के लिए मानक जेब्रा क्रासिंग व फुटपाथ।
  •     बसों व मेट्रो में आधुनिक सुरक्षा उपकरण, चालक-परिचालकों का प्रशिक्षण और बेहतर लास्ट माइल कनेक्टिविटी।
  •     कॉम्प्रेहेंसिव फायर मैनेजमेंट प्लान के तहत हर 50 हजार की आबादी पर एक नए फायर स्टेशन का निर्माण।
  •     आपातकाल के लिए स्कूल, कॉलेज व सामुदायिक भवनों को भूकंपरोधी व बाढ़ से सुरक्षित राहत केंद्रों के रूप में तैयार करना।

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