बिहारराज्य

बाढ़ से 50 लाख लोग प्रभावित, नितिन नवीन ने दान किया तीन महीने का राज्यसभा सांसद वेतन

पटना
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन बिहार में बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद के लिए आगे आए हैं। उन्होंने राज्यसभा सांसद के रूप में मिलने वाली अपनी तीन महीने की सैलरी को बाढ़ पीड़ितों के लिए दान करने का ऐलान किया है। नितिन ने लगभग 6.35 लाख रुपये सीएम रिलीफ फंड में भेजे हैं। उन्होंने शुक्रवार को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए यह जानकारी दी। बता दें कि बिहार में बाढ़ से 50 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं।

नितिन नवीन मूलरूप से पटना के रहने वाले हैं और वह अभी बिहार से राज्यसभा सांसद हैं और राज्य सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि बिहार में बाढ़ की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। बाढ़ पीड़ितों तक समय पर राहत और आवश्यक सहायता पहुंचाने के लिए सरकार पूरी तत्परता से काम कर रही है।

सोशल मीडिया पोस्ट में नितिन नवीन ने कहा कि राज्यसभा सांसद के रूप में वह अपने तीन महीने के वेतन की राशि 635000 रुपये मुख्यमंत्री राहत कोष में अंशदान कर रहे हैं।

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि बिहार सरकार द्वारा बाढ़ से प्रभावित हर परिवार को 7-7 हजार रुपये दे रही है। अब तक कुल 550 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता बाढ़ पीड़ितों को दी जा चुकी है। इसके अलावा राहत शिविर, कम्युनिटी किचन, चिकित्सा सुविधाओं और पशु चारे की व्यवस्था बाढ़ प्रभावित इलाकों में की जा रही है।

उन्होंने कहा कि एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। किसानों की फसल क्षति का आकलन कर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी जारी है।

शिवराज ने किया सर्वे, केंद्र से मिलेगी मदद
दो दिन पहले ही केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह के नेतृत्व में दिल्ली से एक टीम ने बिहार आकर बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया था। शिवराज ने कहा था कि केंद्र सरकार बिहार की भरपूर मदद करेगी। बाढ़ का पानी उतरने के बाद नुकसान का सही से आकलन किया जाएगा। केंद्र से एक और टीम भी बिहार आएगी।

50 लाख लोग बाढ़ की चपेट में
बता दें कि बिहार में गंगा, गंडक, कोसी, सोन समेत अन्य प्रमुख नदियों के उफान से बिहार के तटीय इलाकों में बाढ़ ने जमकर कहर बरपाया। अब तक 15 से अधिक जिलों की लगभग 50 लाख की आबादी बाढ़ की चपेट में आ चुकी है। कई लोगों को अपने घरों को छोड़ दूसरी जगह पलायन के लिए मजबूर होना पड़ा। किसी ने अपने खेत-खलिहान तो किसी ने अपने घर-दुकान बाढ़ में खो दिए।

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