आजम खां के जौहर ट्रस्ट को चंदा क्यों? ED ने अनवर से खंगाली फंडिंग की पूरी कहानी

लखनऊ
जौहर ट्रस्ट को अलग-अलग फर्मों और कंपनियों के माध्यम से डोनेशन दिलाने के पीछे क्या वजह थी और इस प्रक्रिया में अनवर की क्या भूमिका रही, ईडी ने गुरुवार को इसी बिंदु पर उससे करीब सात घंटे पूछताछ की।
आजम खां से पूछताछ के बाद लखनऊ स्थित ईडी कार्यालय पहुंचे अनवर से जांच एजेंसी ने ट्रस्ट को ही डोनेशन दिए जाने का कारण, संबंधित फर्मों से उसके संबंध और धनराशि के लेन-देन से जुड़े सवाल किए। सूत्रों के अनुसार, पूछताछ में कई सवालों पर अनवर अपनी भूमिका स्पष्ट नहीं कर सका।
ईडी ने डोनेशन को लेकर पूछा सवाल
ईडी ने खास तौर पर यह जानने का प्रयास किया कि अलग-अलग कंपनियों और फर्मों से जौहर ट्रस्ट को ही डोनेशन क्यों दिलाया गया। जांच एजेंसी ने अनवर से संबंधित कंपनियों, उनमें काम करने वाले लोगों तथा ट्रस्ट को दी गई धनराशि के बारे में जानकारी मांगी।
यह भी पूछा गया कि डोनेशन दिलाने की प्रक्रिया में उसकी क्या भूमिका थी और इसके लिए किस स्तर पर बातचीत हुई थी। सूत्रों के मुताबिक, इन सवालों पर अनवर अपनी भूमिका स्पष्ट नहीं कर सका।
अनवर आजम का रामपुर और वाराणसी का काम देखता रहा। ईडी ने अलग-अलग फर्मों में काम और अन्य कारोबारी गतिविधियों से जुड़े लोगों से जौहर ट्रस्ट के लिए डोनेशन किस प्रक्रिया के तहत लिया गया।
एजेंसी संबंधित दस्तावेजों और पूर्व में सामने आए बयानों का मिलान कर रही है। अनवर के बयान को आजम खां से पूछताछ के दौरान सामने आए तथ्यों से भी मिलाया जाएगा।
अनवर को आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम का करीबी है। जौहर ट्रस्ट में अवनर न तो को सदस्य रहा न ही कोई भूमिका रही। इसलिए अनवर के बयान के बाद ईडी कई अन्य से पूछताछ करेगी।
सूत्रों के अनुसार, रामपुर में दर्ज मुकदमे और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर ईडी आगे की कार्रवाई पर निर्णय ले सकती है। यदि जांच में आरोपों और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की पुष्टि करने वाले पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो आरोपितों के विरुद्ध गिरफ्तारी समेत अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
सालिम को 21 अक्टूबर को तीसरी बार बुलावा
जौहर ट्रस्ट मामले में आजम खां के करीबी सालिम को ईडी ने 21 अक्टूबर को तीसरी बार पूछताछ के लिए बुलाया है। सालिम से भी ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय लेन-देन और संबंधित फर्मों के बारे में जानकारी ली जा रही है। अनवर से पूछताछ के बाद मिले तथ्यों को सालिम के पूर्व बयानों और दस्तावेजों से मिलाए जाने की संभावना है।



